हुनरमंद
हुनरमंद हुनरमंद होना अब कोई मायने नहीं रखता , अब तो डिग्रीयो का खेल है सारा ! तभी तो बड़े-बड़े पदो पर डिग्री धारी बैठे हैं ! जो जमीन से दूर ओर अनुभव में खाली होते हैं ! जो अपने अधीनस्थो का शोषण करते हैं ! अपना काम ओरो को थोप कर नम्बर अपना बढ़ाते है ! ओर अपने मातहतो के आगे खुद काबिल बन जाते हैं ! कह " नाना " सामंती सोच अब भी जिन्दा है ! राजाओ की राजशाही नहीं रही पर, अफ़सर शाही अब भी जिन्दा है !